पाचन तंत्र की समस्याएं आजकल आम हो गई हैं, जिनमें गैस, कब्ज, बदहजमी और एसिडिटी प्रमुख रूप से शामिल हैं। अनियमित दिनचर्या, असंतुलित आहार, अत्यधिक मसालेदार भोजन और तनाव के कारण यह समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। अगर समय रहते इन पर ध्यान न दिया जाए, तो यह गंभीर रूप ले सकती हैं और पाचन तंत्र को कमजोर कर सकती हैं।
गैस्ट्राइटिस, जो पेट की अंदरूनी परत (म्यूकोसा) में सूजन या जलन के कारण होता है, ऐसी ही एक समस्या है। यह लंबे समय तक बनी रहे, तो अल्सर जैसी जटिलताएं भी हो सकती हैं। आयुर्वेद में इसे "ऊर्ध्वगा अमलपित्त" कहा जाता है, और इसे पित्त दोष के असंतुलन से जोड़ा जाता है। जब शरीर में पित्त बढ़ जाता है, तो यह एसिडिटी, अपच, पेट में जलन और गैस की समस्या को बढ़ावा देता है।
आयुर्वेदिक चिकित्सा पाचन संबंधी विकारों को प्राकृतिक रूप से संतुलित करने पर जोर देती है। सही आहार, हर्बल उपचार, और स्वस्थ दिनचर्या अपनाकर इन समस्याओं से राहत पाई जा सकती है। यदि आप गैस, कब्ज और एसिडिटी से परेशान हैं, तो आयुर्वेदिक समाधान एक प्रभावी और सुरक्षित विकल्प हो सकता है।
आयुर्वेद के अनुसार, गंभीर जठरशोथ (Severe Gastritis) को "उर्ध्वगा अमलपित्त रोग" कहते है। जो मुख्य रूप से मेटाबोलिक विकार या पित्त दोष के बढ़ने के कारण उत्पन्न होता है। अनुचित आहार संबंधी आदतें पेट में पित दोष को प्रभावित करती हैं, जिससे यह अधिक विषाक्त पदार्थ या एसिड पैदा करता है और अधिक पाचन एंजाइम स्रावित करता है, जिसके परिणामस्वरूप जठरशोथ या गैस होता है।
यदि आप गैस्ट्राइटिस से पीड़ित हैं, तो आप आहार और जीवन शैली में इन परिवर्तनों को अपना सकते हैं और खुद कोswasth रखने के लिए निम्नलिखित उपाए कर सकते हैं -
1. अविपत्तिकर चूर्ण
अविपत्तिकर चूर्ण पेट में अम्लता को कम करता है, और बेचैनी से राहत देता है। यह गैस बनने को कम करता है और आंतों की गति को प्रेरित करता है जिससे आपको कब्ज से राहत मिलती है।
2. एसिडोग्रिट टैबलेट
एसिडोग्रिट टैबलेट एक आयुर्वेदिक दवा है जो अपच, कब्ज, पेट फूलना, गैस्ट्रिक शूल, मतली और उल्टी के लिए उपयोगी है और शरीर को डिटॉक्सीफाई करने में सहायता करती है और इम्युनिटी को भी बढाती है। यह गैस के कारण होने वाली सूजन से राहत देता है और पेट में एसिड स्तर को कम करता है। इस दवा का कोई साइड इफेक्ट नहीं है।
3. गैसहर चूर्ण
गैसहर चूर्ण एक बहुत ही प्रभावी पाचक औषधि है जो पाचन में सहायता करती है। यह पाचन एंजाइमों को बढाता है और स्वाभाविक रूप से पाचन संबंधी विकारों को ठीक करता है। गैस केइकठ्ठा होने से सिरदर्द और बेचैनी होती है। ये चूर्ण एंटासिड गुणों वाले हर्बल पाउडर का एक संयोजन है। यह अम्लता को शांत करता है और गैस और बेचैनी को दबा देता है। दिव्य गैसहर चूर्ण आपके पाचन तंत्र को मजबूत करता है और भूख बढ़ाता है।
गैस्ट्राइटिस से बचाव और इसके लक्षणों को कम करने के लिए जीवनशैली और आहार में सही बदलाव जरूरी हैं। यह समस्या अक्सर खराब मेटाबोलिक गतिविधियों (Metabolic Activities) का संकेत होती है, जो यदि अनियंत्रित रहे, तो गैस्ट्रिक अल्सर, मधुमेह, पीठ दर्द, जोड़ों का दर्द और यहां तक कि गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है। इसलिए, केवल लक्षणों का इलाज करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि शरीर के मेटाबोलिज्म को संतुलित करना भी आवश्यक है। आयुर्वेद में संतुलित आहार और दिनचर्या पर जोर दिया गया है। पाचन को मजबूत करने के लिए हल्का, सुपाच्य और ताजा भोजन करें। अत्यधिक मसालेदार, तली-भुनी चीजों और ज्यादा कैफीन के सेवन से बचें। ठंडे और शीतल प्रभाव वाले खाद्य पदार्थ, जैसे नारियल पानी, सौंफ, मिश्री और छाछ को अपने आहार में शामिल करें। इसके अलावा, योग और ध्यान जैसी प्राकृतिक विधियां तनाव को कम करके पाचन तंत्र को मजबूत करने में मदद करती हैं। यदि गैस्ट्राइटिस की समस्या लंबे समय तक बनी रहे, तो अपने आहार और दिनचर्या का पुनर्मूल्यांकन करें। सही आदतों को अपनाकर और संतुलित जीवनशैली का पालन करके इस समस्या से स्थायी रूप से राहत पाई जा सकती है। इस के लिए आप healthybazar पर हमारे आयुर्वेदिक डॉक्टर से सलाह ले कर ख़राब मेटाबोलिज्म और गैस्ट्रिटिस से छुटकारा पा सकते है ।
Dr. Shivani Nautiyal is a renowned Ayurvedic physician, Panchakarma therapies specialist, and detox expert who has made significant contributions to the field of natural holistic healing and wellness. With her profound knowledge, expertise, and compassionate approach, she has transformed the lives of countless individuals seeking holistic health solutions. She is a Panchakarma expert, which are ancient detoxification and rejuvenation techniques. She believes in the power of Ayurveda to restore balance and harmony to the body, mind, and spirit.