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Published 24-06-2023

लिवर के टॉक्सिन्स को बहार निकलने के आयुर्वेदिक तरीके और उपचार

LIVER AND KIDNEYS

लिवर के टॉक्सिन्स को बहार निकलने के आयुर्वेदिक तरीके और उपचार

Sonal Rani

Sonal Rani has 3 years of experience in research and content writing. A health enthusiast, she has a keen interest in writing health-related articles. Leveraging her knowledge and expertise, Sonal has created numerous informative and valuable articles that guide readers towards better health and wellness.

लीवर आपके शरीर का महत्वपूर्ण अंग है जो विभिन्न कार्यों में लगा होता है, जैसे कि खाद्य पचाना, विषाक्त पदार्थों को मेटाबॉलाइज़ करना, सूखे और ग्रीसी खाद्यों को ट्रांसफॉर्म करना आदि। इसलिए, एक स्वस्थ लीवर रखना आपके स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।

आयुर्वेद में विभिन्न तरीकों का उपयोग किया जाता है जो लीवर को साफ करने और टॉक्सिन्स को बहार निकालने में मदद करते हैं। यहां कुछ आयुर्वेदिक उपाय और उपचार हैं जो लीवर को स्वस्थ रखने में सहायता कर सकते हैं:

1. भूम्यामलकी (फूटी कटी) : भूम्यामलकी एक प्रमुख आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी है जिसे लीवर को साफ करने के लिए प्रयोग किया जाता है। इसे काढ़े के रूप में ले सकते हैं या इसके पाउडर को पानी में मिलाकर सेवन कर सकते हैं।

2. अर्जुन की छाल : अर्जुन की छाल एक औषधीय वृक्ष है जिसमें लीवर को स्वस्थ रखने के गुण पाए जाते हैं। इसके पाउडर को गर्म पानी के साथ मिश्रित करके सेवन कर सकते हैं।

3. गुडूची : गुडूची एक चिकित्सात्मक पौधा है जिसे लीवर को स्वस्थ रखने के लिए उपयोग किया जाता है। इसे काढ़े के रूप में ले सकते हैं या इसके सूखे पत्तों को गर्म पानी में भिगोकर पी सकते हैं।

4. आंवला : आंवला लीवर के लिए बहुत लाभकारी होता है क्योंकि इसमें विटामिन C और एंटीऑक्सिडेंट प्रभावी तत्व पाए जाते हैं। इसे स्वादिष्ट मुरब्बा, स्वरस या रस प्रकार में सेवन कर सकते हैं।

5. पुदीना : पुदीना में पाए जाने वाले प्राकृतिक तत्व लीवर के लिए शुद्धिकरण गुण प्रदान करते हैं। इसे खाने में या पुदीना की चाय के रूप में उपयोग कर सकते हैं।

6. घृतकुमारी : घृतकुमारी लीवर को स्वस्थ रखने के लिए प्रयोग की जाने वाली अन्य एक प्रमुख औषधीय पौधा है। इसका रस पी सकते हैं या इसके पत्तों का रस निकालकर सेवन कर सकते हैं।

7. त्रिफला : त्रिफला एक औषधीय योग है जिसमें अमला, हरीतकी और बहेड़ा होता है। इसे पाउडर के रूप में ले सकते हैं और इसे पानी के साथ सेवन कर सकते हैं।

 

इन आयुर्वेदिक तरीकों के अलावा, आप अपने लीवर को स्वस्थ रखने के लिए निम्नलिखित उपायों का भी उपयोग कर सकते हैं: 

 

1. स्वस्थ आहार: अपने आहार में पोषक तत्वों को शामिल करें जैसे कि फल, सब्जियां, पूर्ण अनाज, हरी पत्तेदार सब्जियां आदि। इसके साथ ही, जंक फूड, मसालेदार और तले हुए खाने से बचें।

2. प्रतिरक्षा प्रणाली का समर्थन करें: अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली को स्वस्थ रखने के लिए पर्याप्त पानी पिएं, नियमित व्यायाम करें और पर्याप्त आराम लें।

3. विषाक्त पदार्थों से बचें: अपने शरीर को विषाक्त पदार्थों से दूर रखने के लिए अल्कोहल, तंबाकू, जंक फूड, कैफीन, आदि का सेवन कम करें।

4. नियमित पाचन शोधन करें: नियमित रूप से पाचन शोधन करने के लिए अपनी आहार में अम्ल जैसे कि नींबू का रस, खट्टी दही, खट्टे फल और खट्टा पदार्थ शामिल करें।

5. अच्छी नींद लें: नियमित और पर्याप्त नींद लेना आपके लीवर के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे शरीर के ऊर्जा स्तर को संतुलित रखने में मदद मिलती है।

इन उपायों को अपनाकर आप अपने लीवर के टॉक्सिन्स को बहार निकालने और स्वस्थ रखने में सहायता प्राप्त कर सकते हैं। हालांकि, इससे पहले अपने आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श लेना सुरक्षित और उचित होगा। वे आपके विशेष स्थिति को मान्यता देंगे और आपके लिए सबसे उपयुक्त औषधीय प्रयोग की सलाह देंगे। इसके आलावा आप आयुर्वेदिक पंचकर्मा एक प्रमुख आयुर्वेदिक चिकित्सा प्रक्रिया है जो शरीर के विभिन्न अंगों की शुद्धि करने में मदद करती है, जिसमें लिवर भी शामिल है। 

पंचकर्मा के माध्यम से लिवर को साफ करने और टॉक्सिन को बाहर निकालने में निम्नलिखित तकनीकें मदद करती हैं:

 

1. वमन (Vamana): यह प्रक्रिया माध्यम से मलास्थली से उल्टी के माध्यम से लिवर के अतिरिक्त विषाक्त पदार्थों को निकालने में मदद करती है। इसमें विशेष आहार, दवाएं और उपयुक्त विश्राम का उपयोग किया जाता है।

2. विरेचन (Virechana): इस प्रक्रिया में, विषाक्त पदार्थों को आपके शरीर से बाहर निकालने के लिए पुर्गेशन (पेचिशन) का उपयोग किया जाता है। इसमें आपके शरीर की सफाई को सुनिश्चित करने में मदद मिलती है।

3. नस्या (Nasya): इस प्रक्रिया में, औषधि नासिका (नाक) के माध्यम से लीवर की शुद्धि के लिए इंजेक्शन, घृत या औषधि नास्य के रूप में उपयोग की जाती है। यह प्रक्रिया लीवर की क्षमता को बढ़ाने, टॉक्सिन को बाहर निकालने और संतुलित प्रक्रिया को पुनर्स्थापित करने में मदद करती है।

4. बस्ती (Basti): यह प्रक्रिया कठोर औषधियों का उपयोग करके लीवर के लिए प्रभावी होती है। इसमें औषधि को गुदा के माध्यम से दिया जाता है, जिससे लीवर को पोषण मिलता है और उसकी क्षमता में सुधार होती है।

पंचकर्मा के इन तकनीकों का उपयोग करके लीवर को साफ करने और टॉक्सिन को बाहर निकालने में मदद मिलती है। यह प्रक्रियाएं विशेषज्ञ आयुर्वेदिक चिकित्सक द्वारा निर्देशित की जानी चाहिए और उनकी निगरानी में होनी चाहिए। आपके स्थिति के आधार पर, विशेषज्ञ आपको सबसे उपयुक्त और सुरक्षित पंचकर्मा प्रक्रिया की सलाह देंगे।

 

 

Last Updated: Jun 24, 2023

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